सोया रहा मैं कई जन्मों से,
अब जागन की बारी ।
सूर्य उगा पुरब की नभ से,
हुई रौशन जग सारी ।।
चिड़ीयाँ भी है चिल-मिल करती,
कोयल कुहुं-कुहुं करती ।
खबर दे रहे अपनी पथ की,
अब जागन की बारी ।।
मंद सुगंध हवा रही चलती,
जाने दुनिया सारी ।
खबर दे रही अपने पिया की,
अब जागन की बारी ।।
भँवरें भी है घुँ-घुँ करती,
मधु पी रही है सारी ।
फूल भी दिवानी हो गई,
अब जागन की बारी ।।
बरस रही है रिम-झीम करती,
यह बादल दिवानी ।
खबर दे रही अनंत आनंद की,
अब जागन की बारी ।।
धरती भी है शोभा दे रही,
हरी चादर है ओडी ।
घास पे उतरी ओस कह रही,
अब जागन की बारी ।।
रंग बदलता नभ भी अपनी,
खुशी से सहमती दे दी ।
अंतर में अनहद गुँज रही,
अब जागन की बारी ।।
No comments:
Post a Comment