तुम्ही से ज्ञान का दिपक जला है,
तुम्ही से घन घोर अंधेरा मिटा है ।
तुम जो नही गुरुजी कुछ भी नहीं है,
हमें और रास्तों की जरुरत नहीं है,
हमें तेरे चरणों का निशा मिल गया है
।।
तुम ही ब्रह्मा विष्णु, शिव
का हो संगम,
तेरे वास्ते सब है, और
सब तुझ को अर्पण,
अब कुछ तुम्ही हो, सब
कुछ तुम्ही हो,
हमें तेरे चरणों का निशा मिल गया है
।
छाये जो दिल पे गम का अंधेरा,
तनहाईयों ने जो मन को है घेरा,
खिलता सवेरा तेरी याद लेकर,
हमें तेरे चरणों का निशा मिल गया है
।
कलियों में तू है फूलों में तू है,
सागर की एक एक लहरों में तू है,
कहीं भी मैं जाऊँ बस तू ही अब तू है,
हमें तेरे चरणों का निशा मिल गया है
।
जन जन की सेवा यहीं तेरी पूजा,
तुम ही अब तुम हो ना है कोई दूजा,
तुमसे है रोशन यह जग सारा,
हमें तेरे चरणों का निशा मिल गया है
।
कण कण में तू है क्षण-क्षण अब तू है,
तेरी याद में बापू हम खोये हुए है,
तेरे सिवा अब कुछ सुझे नही है,
हमें तेरे चरणों का निशा मिल गया
हैं ।।
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