मेरे
गुरु का पताका लहरायेगा,
विश्व
भर में सदा फेहेरायेगा ।
जगायेगा
उन सबके दिलों को,
जो
सदा मोह नींद गहेरायेगा ।
अज्ञान
अंधेरा यह मिट जायेगा,
शुभ
सुबह जब अंबर समायेगा ।
जनायेगा
अपने निज हस्ती को,
जब
भी गुरु ज्ञान शंख बजायेगा ।
निंदा
नफरत सब मिटजायेगा ,
समत्व
और प्रेम डेरा जमायेगा ।
उठायेगा
अंतर की चेतना को,
तब
ये समा भी नन्हा हो जायेगा ।
आनंद
ही आनंद जब आयेगा,
तब
न कोई दूजा रह जायेगा ।
भारत
की यह नव चैतन्य ही,
सारे
विश्व का गुरु कहलायेगा ।
ॐ......
ॐ...... ॐ...... ॐ......
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