ये दुनिया है खबरी,
दे खबर मेरे यार की।
पत्थर पहाड़ों में,
मिट्टी की ढेलों में,
मेरा यार गहरा सो रहा,
ये दुनिया खो रहा।
ये दुनिया है खबरी,
दे खबर मेरे यार की।
झरनें औ नदियों में,
फूलों की बगीयों में,
मेरा यार करवटे ले रहा,
ये दुनिया जान रहा।
ये दुनिया है खबरी,
दे खबर मेरे यार की।
हवा औ बहारों में,
जीवों के अंतर में,
मेरा यार सपनें देख रहा,
ये दुनिया मोह रहा।
ये दुनिया है खबरी,
दे खबर मेरे यार की।
अंबर औ अग्नि में,
ज्ञानि की मस्ति में,
मेरा यार अनहद जग रहा,
ये दुनिया समा रहा।
ये दुनिया है खबरी,
दे खबर मेरे यार की।
जीवन की पल-पल में,
अंतिम के कुछ कल में,
मेरा यार मुझसे मिल रहा,
मैं दुनिया में चल रहा,
यार को भूल रहा,
जनम रहा मर रहा।
ये दुनिया है खबरि,
दे खबर मेरे यार की।
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