ना जाने कौनसी घड़ी

ना जाने कौनसी घड़ी,
मुलाकात हो रब से।
दिदार करने चलू और,
पहचान हो खुद से।।

खुद कि बुलंदी की,
बयाँ न करुँ तब से।
जबा पे काबू न रहे,
खो जाऊँ मैं जब से।।

खुद कि इनायत की,
करें बयाँ रब खुद से।
रहमियत गवाह रहे,
बच न पाऊँ उससे।।

छुटे जंजाल मैं मेरी,
खुदा की रौशन से।
खुद खुदा हो हरतरफ,
मिटा गुरुर तब से।।

हर दिन दिवाली सी,
दुनिया ये रौशन हो।
हर कदम मुलाकाति,
आबादि हो खुद से।।

ॐ.... ॐ.... ॐ.....



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